Tuesday, January 24, 2017

ज़ालिमा

Good melody. If you catch on to the melody once, you feel like listening to it over and over again.



... ♫ ♫ ♫ ♫ ...
जो तेरी खातिर तड़पे पहले से ही
क्या उसे तड़पाना, ओ ज़ालिमा
जो तेरे इश्क़ में बहका पहले से ही
क्या उसे बहकाना, ओ ज़ालिमा, ओ ज़ालिमा

... ♫ ♫ ♫ ♫ ...
आँखें मरहबा, बातें मरहबा
मैं सौ मरतबा, दीवाना हुआ
मेरा न रहा, कब से दिल मेरा
तेरे हुस्न का निशाना हुआ
जिसकी हर धड़कन तू हो
ऐसे दिल को क्या धड़काना, ओ ज़ालिमा, ओ ज़ालिमा

... ♫ ♫ ♫ ♫ ...
साँसों में तेरी नज़दीकियों का
इतर तू घोल दे, घोल दे ...
मैं ही क्यों इश्क़ ज़ाहिर करूँ
तू भी कभी बोल दे, बोल दे
ले के जान ही, जाएगा मेरी
क़ातिल हर तेरा बहाना हुआ
तुझसे ही शुरू, तुझपे ही ख़तम
मेरे प्यार का अफ़साना हुआ
तू शम्मा है तो, याद रखना,
मैं भी हूँ परवाना, ओ ज़ालिमा, ओ ज़ालिमा ...
दीदार तेरा मिलने के बाद ही
छूटे मेरी अंगड़ाई
तू ही बता दे क्यों ज़ालिमा मैं कहलाई
क्यों इस तरह से दुनिया जहाँ में
करता है मेरी रुसवाई
तेरा क़ुसूर और मैं ज़ालिमा कहलाई 

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